पुस्तक समीक्षा | प्यारी मैडम

प्यारी मैडम खतों से बुनी एक कहानी है जिसमें एक गुरु और शिष्य के बीच का सुंदर रिश्ता दर्शाया गया है | इन खतों को एक छोटी बच्ची अपनी मैडम को लिख रही है जिसमे ख़ुशी है, प्यार है, गुस्सा है, शरासत है और ढेरों सवाल है हम सब के लिए |

राखी सिंह

किताब: प्यारी मैडम
कथा: रिनचिन
चित्रांकन: शिवात्मिका लाला
पन्ने: 24
प्रकाशक: एकलव्य
पाठक आयु वर्ग: 5+ वर्ष

संघर्ष का नाम ही जीवन है, इसका एक बहुत सटीक उदाहरण है यह चिट्ठियों का संग्रह, जिसको सहेज कर बांधा है प्यारी मैडम नामक पुस्तिका में । अपने मन से निकलते हुए हर एक भाव को एक छोटी सी बच्ची ने इतनी सरलता से चिट्ठियों के द्वारा अपनी प्यारी मैडम तक पहुंचाया है। एक बच्चे का मन कितना निश्छल होता है, इन चिट्ठियों के द्वारा किए गए सवालों से पता चलता है ।
प्यारी मैडम नामक चिट्ठियों से बुनी एक कहानी है जिसके द्वारा एक नन्ही सी बच्ची, दिन भर के घटित हरेक घटनाओं को बड़े ही सरलता के साथ अपने गुरु के साथ बाँटती है । वह विद्यालय आना चाहती है पर उसके और उसके परिवार के जीवन में हर दिन कोई न कोई नई चुनौती खड़ी हो जाती है जिसके कारण वह विद्यालय आने में असमर्थ है। बिना लीपा-पोती किए वह अपने गुरु से हर बात बेझिझक कहती है। अपनी हर एक उलझन का जवाब भी अपने गुरु से चाहती है क्योंकि उसे पता है कि पूरे गाँव में उसके गुरु जैसा पढ़ा-लिखा और समझदार कोई नहीं है।
प्यारी मैडम द्वारा बड़ी सहजता से दर्शाया गया है कि बच्चों का दिल कितना साफ और सरल होता है । अपनी चिट्ठियों के माध्यम से एक नन्ही बच्ची ने गाँव के अनेकों गंभीर समस्याओं को बड़े ही मार्मिक ढंग से उजागर कर पाती है । गाँव में रहने वाले लोग जितने सीधे और सरल होते हैं, ठीक वैसा ही उनका जीवन होता है। पर औद्योगिक विकास के नाम पर जब कुछ पढ़े लिखे और लालची लोग उनकी सादगी का गलत इस्तेमाल करते हैं, तब वह बगावत पर भी उतर आते हैं। रातों रात उन्हें उनकी ही ज़मीन से कैसे बेदखल कर दिया जाता है और वह अनेक कोशिशों के बाद भी कुछ भी करने में असमर्थ होते हैं क्योंकि अनपढ़ होने के कारण उन्हें कानून का भी ज़्यादा ज्ञान नहीं होता। अपनी ही आंखों के सामने बेबस हो अपना सब कुछ लुटता देखते हैं, क्योंकि वह बड़े आसानी से कुछ पढ़े लिखे चालाक व्यापारी के जाल का शिकार हो जाते हैं।
प्यारी मैडम के माध्यम से हम यह भी जानते हैं कि गाँव के बच्चों का जीवन शहर में रहने वाले बच्चों से बिल्कुल भिन्न है। गाँव में बच्चे चाह कर भी अधिक नहीं पढ़ सकते क्योंकि इनके लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण काम काज और कड़ी मेहनत करके अपना जीवन यापन होता है। यह सब करने के कारण उन्हें पढ़ाई के लिए ज़्यादा वक़्त नहीं मिलता ।
यह बहुत ही अनोखा चिट्ठियों का संग्रह है जिसमें एक गुरु और शिष्य के बीच का सुंदर रिश्ता दर्शाया गया है और अपने बच्चों को संवेदनशील बनाने के लिए यह कहानी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है ।

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