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एक टीन एजर लड़के की माँ

एक टीन एज बेटे की माँ उसकी नजरों से
टीन एजर लड़कों की दुनिया समझ रही है.

श्रुति अग्रवाल

Just put two balls in your underwear then you will understand what boys are going through in teenage.”
जब आपका बेटा आपको ऐसा जवाब देता है… तब तीन बहनों के साथ पली-बढ़ी माँ को समझ आता है 13 टीन…हो रहे लड़के के साथ भी कई तरह के हार्मोनल चेंजेस होते हैं, जिन्हें समझना माँ-पिता ही नहीं परिवेश और समाज को भी समझना बेहद आवश्यक है। हमारा समाज कुछ ऐसे ताने-बाने में गुथा हुआ है कि मर्द को दर्द नहीं होता की कहावत 10 साल के लड़के पर भी फिट बैठाने की कोशिश करता है। लड़के होकर रोते हो ….अब घाघरा पहन लो ….लड़की हो क्या…ना जाने कितने ताने-उलाहने हैं जिनके बीच हम समझ ही नहीं पाते हमेशा खिलंदड़ बने रहने वाले लड़के आखिर क्यों गुमसुम या गुस्सैमल हो जाते हैं। टीनएज लड़कियों की तरह हार्मोनल लोचा टीन एज लड़कों को भी एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। उन्हें अपनी दुनिया से जोड़े रखने के लिए अपने बेटों की समस्याओं को समझना खूब जरूरी।

हम तीन बहनें थे, मैं बीच की थी इसलिए समस्याओं से ज्यादा दो चार नहीं हुई। मुझसे दो साल बड़ी बहन ने मुझे सारी जानकारी दे दी…वो बहन-दोस्त-मेंटर तीनों थी। छोटी के लिए हम दोनों थे। खुले माहौल में परवरिश हुई इसलिए माँ तो छोड़िए पापाजी से भी बात कर लेते थे। टीनएजर भाईयों से मुलाकात सिर्फ गर्मी की छुट्टियों में होती थी। जब कजिन्स बहने भी पेटदर्द कहकर रोती या सोती…भाई बाहर खेलते रहते। मुझे उनके टीन-एज की एक ही याद है, उनकी बदबूदार बनियान या मोजे…जिसे वे खेलकर आने के बाद हम बहनों को चिढ़ाने के लिए हमारे ऊपर फेंकते थे…इसके अलावा मुझे लगता था….दुनिया की सारी तकलीफें हम लड़कियों के लिए ही बनी हैं। बॉडी ग्रोइंग पेंस से लेकर बॉडी शेमिंग तक लेकिन एक बेटे की माँ हूं उसके टीन एज होने के साथ-साथ उसकी नजर से दुनिया समझ रही हूं। सबसे बड़ी बात हम एकल परिवार में रह रहे हैं, अधिकांश के एक ही बच्चा है इसलिए वे अपनी प्रॉब्लम्स सिबलिंग से शेयर नहीं कर सकते।

10 साल का था मेरा बेटा…जब उसे प्यूबिक हेयर आने शुरू हुए थे। वो डरा-सहमा सा मेरे पास आया…माँ…माँजी मुझे कुछ हो गया है। मैं मुस्कुरा कर रह गई…बताया वो बड़ा हो रहा है..बॉडी चेंज होगी। कोई दिक्कत नहीं है। फिर उसके पापा ने उससे कुछ बातें की। वो थोड़ा नार्मल हो गया। उसके बाद जब-तक वो चेस्ट पेन से लेकर बोन पेन की बातें बताने लगा। शुरू में मुझे लगा स्पोर्ट्स-स्टडी-डिबेट…ओवर एंग्जायटी दे रही हैं, जिसके कारण वो परेशान है। फिर समझ में आया सब नार्मल ग्रोइंग पेन्स हैं..मैंने उसके फूड में प्रोटीन बढ़ा दिया, बॉडी को लचीला बनाने की एक्सरसाइज कराने लगी। इसके बाद एक अजब-गजब सी घटना हुई। हम घूमने गए थे….छतरपुर के पास भीमकुंड पड़ा…टरक्वाइश ब्लू वॉटर….मेरा बेटा जो बेहद अच्छा स्विमर है, उसने पानी में उतरने से मना कर दिया। जबकि उसके पापा तैरने उतर चुके थे। ये मेरे लिए बेहद अजीब घटना थी क्योंकि बचपन से ही वो पानी देख पगला जाता था। एक साल की उम्र में माइनस के करीब पहुंचे तापमान में भी बर्फीली नदी में हाथ डालने की हिम्मत रखता था…अब मुझसे रहा ना गया…एक माँ की क्लास शुरू हो गई…खत्म हुई मैन बूब्स पर जाकर। मेरे 12 साल के बेटे पर प्यूबिटी असर दिखा रही थी…उसे मैंस बूब्स आ रहे थे…वो हिचक रहा था। पहली बार मैंने इंटरनेट का सहारा लिया। पहले खुद खोजा फिर उसके साथ बैठकर सारी अच्छी साइट्स को खंगाला…फिर कुछ फंतासी कहानियां बनाई और बताया सिक्स पैक्स क्या होते हैं? कुंभलगढ़ ले जाकर महाराणा प्रताप से परिचय कराया…उनका कवच दिखाया…बताया मैंस बूब्स के लिए देखो जगह है…उसे सहज किया…यह समझाया कि थोड़े समय बाद यही पैक्स बनेंगे। तब पता चला वो अकेला नहीं है उसके अधिकांश दोस्त बॉडी शेमिंग के दौर से गुजर रहे हैं। फिर वक्त आया जब मैं उसे लड़कियों के मासिक धर्म- शारिरिक परिवर्तन के कारण चिड़चिड़ा होने, गुस्सा होने की बात समझाते हुए अपनी फ्रेंड्स से सहज होना समझा रही थी…वो बोल उठा माँ प्रॉब्ल्मस सिर्फ लड़कियों को नहीं होती….हम लड़कों को भी होती है…”Just put two balls in your underwear then you will understand what boys are going through in teenage…” मैं और मेरे सारे दोस्त भी बेहद अजीब महसूस कर रहे हैं। ये मेरे लिए फाइनल वर्ड्स थे, मुझे समझ में आया लड़कों में टीन प्रॉब्ल्म्स कम नहीं होती…टीनएज लड़कों का गुस्सैल हो जाना, गुमसुम हो जाना या बात-बात में चिड़चिड़ाना आम नहीं यह टीनएज का कैमिकल लोचा है जिसे सिर्फ बात करके और उन्हें समझ कर ही समझा जा सकता है और उन्हें समझाया जा सकता है।

कॉमन टीन एज प्रॉब्लम: सबसे पहले हमें यह समझना होगा अब टीन एज 13 टीन नहीं बल्कि 11 से शुरू है….हमारे बच्चों को टीवी-नेट जरूरत से पहले एक्सपोजर दे रहा है इसलिए अच्छा है कि आप भी उनसे खुलकर सही बात करें…बात करते समय ध्यान रखें हमें उन्हें शेर आया-शेर आया कहकर डराना नहीं है बल्कि तैयार करना है टीनएज प्रॉब्लम्स से निपटते हुए खुश रहने के लिए।

बॉडी शेमिंग: यह सिर्फ लड़कियों में नहीं होता। हमने समाज में ना जाने कितने आदर्श बना रखे हैं परफेक्ट बॉडी के। हर टीनएजर की बॉडी अलग होती है। ग्रोइंग एज में लड़कों को प्यूबिक हेयर जो जननांग से लेकर दाड़ी-मूंछ सबमें आते हैं उसे समझना होगा। साथ ही बॉडी पेंस से लेकर मैंस बूब्स सब पर खुलकर बात करनी होगी। यदि आपका बच्चा बहुत नकारात्मक हो रहा हो तो किसी डॉक्टर की सलाह लेना बेहतरीन है।

प्राइवेट पार्ट्स: इस समय लड़कों को प्यूबिक हेयर आते हैं…उनकी बॉल्स ग्रो होती हैं। पेनिस का टाइट होना उनके लिए विचित्र अनुभव होता है। कुछ बच्चों को नाइटफॉल होता है। जिस तरह हम लड़कियों के अंडरगारमेंट्स का ध्यान रखते हैं उसी तरह लड़कों के अंडरगारमेंट्स का भी रखें। उन्हें रात को अपनी यूजी बदलना सिखाएं। प्राइवेट पार्ट ग्रो होते हैं इसलिए थोड़ा कंफर्टेबल यूजी देखें। मैंने रात के लिए सारे कॉटन बॉक्सर लिए हुए थे। इस समय बच्चों को हाइजीन सिखाएं…जरूरी नहीं कि यह काम केवल पिता के हिस्से का है। जो बेटा माँ के वजाइना से जन्म लेता है, स्तन से दूध पीता है उसके और आपके बीच कैसी लज्जा। बच्चे दुनिया में सबसे सहज अपनी माँ के साथ ही हो सकते हैं। हाँ बात करते समय आप खुद अलग-अलग तरह के उदाहरण दे बचने की कोशिश करें तो पूरा सीन बदल सकता है। टीनएज बच्चों के साथ सीधी-सपाट बातें अकसर बेहतर होती हैं।

सैक्चुअल डिजायर: टीन एज का यह पार्ट बेहद खतरनाक है, बच्चा ‘माइकल इन द मिडिल’ की एज में है। विपरीत लिंग के प्रति सहज आकर्षण हो जाता है। इस समय अपने बच्चों को गलत साइट्स औऱ पोर्न से बचाइए। प्लीज….ध्यान रखिए उनका। बात कीजिए उनसे। याद रखिए ‘आधा सच पूरे झूठ’ से ज्यादा खतरनाक होता है। आप उन्हें पूरा सच खुद बताइए…वो आपकी जिम्मेदारी हैं, किसी उल्टी-सीधी साइट की नहीं। टीन एज बच्चे से बंद कीजिए यह कहना की वह ‘आसमान से आया है या किसी पेड़ से टपका फल’ है। याद रखिए वह सब जानता है। 10 साल के बच्चों तक यह बाते अच्छी।

एड्रनिल रश:  इस उम्र में बच्चों में जबरदस्त एड्रनिल रश होता है। उन्हें सिर्फ पढ़ों- पढ़ों इस बात पर जोर मत डालिए…खेलने दीजिए…हो सके तो आप भी उनके खेल में साथी बनिए। वह जितना खेलेंगे उनका शारीरिक विकास भी होगा औऱ ऊर्जा सही जगह लगेगी। मेरे पापाजी अकसर कहते थे, जिन टीनएजर्स को नेचर से प्यार होता है या फिर वे कला (गाना-बजाना-चित्रकारी आदि) में रुचि रखते हैं वे चिड़चिड़े नहीं होते। यह सच भी है..बजाने दीजिए इस उम्र के लड़कों को कांगो या ड्रम…आपके कान दर्द होंगे लेकिन उनका गु्स्सा बाहर निकल जाएगा।

लोनलीनेस: टीन एज के समय दोस्त बड़े निष्ठुर होते हैं। बुली चरम पर होती है। किशोरवय मन कच्चा। ऐसे में बच्चे अकेलापन महसूस करते हैं। टेबलेट-मोबाइल-गेमजोन के साथ अपना सहारा ढूंढते हैं। तो बच्चों के साथ आप बच्चे हो जाइए लेकिन उसके लिए 13 टीन की उम्र में उसकी जिंदगी में दखल  मत दीजिए बल्कि उसकी जिंदगी से दूर ही मत जाइए…जैसे उसके साथ 8 साल की उम्र में थे वैसे ही रहिए बस अपना व्यवहार बदल दीजिए। जैसे आप 1 साल के बच्चे से तुतलाती जुबान में बात कर सकते हैं लेकिन 8 साल के बच्चे से नहीं वैसे ही आप एक टीनएजर से टीन बनकर बात कीजिए वो आपका दोस्त बन जाएगा।

टीन प्रॉब्ल्म्स पर लिखना चाहू तो मैं पूरी किताब लिख सकती हूं क्योंकि अपने बेटे के साथ मैं रोज उसकी और उसके दोस्तों की जिंदगी जी रही हूं। यदि एक माँ की तरह कुछ सीखा है मैंने तो सिर्फ अच्छा वक्त बिताना। मैं अपने 13 साल के बच्चे को 1 माह के लिए अपने साथ अकेले हिमाचल ले गई थी…उसका सबसे अच्छा दोस्त बनने। आज वो 14 का है मैं रोज उसके साथ नाइट वॉक पर जाती हूं …इस आधा घंटे में उसकी, उसके दोस्तों की प्रॉब्ल्म्स से लेकर सपने तक ना जाने क्या-क्या बातें कर लेते हैं हम…उसके साथ मैं एक नई दुनिया को जान रही हूं…टीन एज ब्वाइज की दुनिया जो मेरे लिए नई और बेहद प्यारी है।

(इंदौर निवासी श्रुति अग्रवाल एक वरिष्ठ पत्रकार हैं और पैरेंटिंग और बच्चों के लिए लाइफ स्किल्स पर लिखती हैं. )​

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